वन्दे मातरम, समस्त आत्मीय जनों को आपके अपने गौरव शर्मा "भारतीय" की और से आदाब, सतश्री अकाल, सादर प्रणाम !!
आप सभी सम्मानीय जनों को सूचित करते हुए अत्यंत प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है की हमारा, आपका, जन जन का निस्वार्थ, गैर राजनैतिक गैर जातीय, गैर धार्मिक जन्चेत्नामक आन्दोलन, "अभियान भारतीय" निरंतर प्रगति एवं लोकप्रियता के पथ पर संचालित है | हर आयु, हर वर्ग, हर जाती हर धर्म से समर्थन एवं सहयोग प्राप्त हो रहा है | मै पुनः इस महाभियान को जन जन तक पहुँचाने में तन, मन, धन से जुटे सभी आत्मीय जनों के प्रति आभार व्यक्त करता हूँ एवं भविष्य में भी उनके सहृदय सहयोग को बनाये रखने की अपील करता हूँ |
आज मन में कुछ सवाल हैं उन्हें आप तक पहुँचाने के लिए उपस्थित हूँ | आज मेरी मुलाकात एक 4-5 वर्षीय बालक से हुई जो सच में बड़ा तीव्र बुद्धि का था और बड़ी बेबाकी के साथ हर प्रश्न का उत्तर दे रहा था वह भी फर्राटेदार अंग्रेजी में, उसके साथ उसके माता पिता भी थे जो उसकी विद्वता पर मुस्कुरा रहे थे और अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर रहे थे | जानकर आश्चर्य होगा की वह बालक बड़ी बेबाकी के साथ अंग्रेजी में किये गए प्रश्नों का उत्तर तो दे पा रहा था पर जब उससे हिंदी में कुछ पूछा जाता तो वह दिन में तारे गिनने लगता और उसके माता पिता फिर से बड़े गर्व के साथ बताते की यह इंग्लिश मीडियम का स्टुडेंट है, इसलिए ठीक से हिंदी नहीं बोल पाता हाँ इंग्लिश में आप जो भी पूछ लें यह बता देगा, मै जब से उस बालक से मिला हूँ मन में यह प्रश्न बार बार आता है की क्या यही हैं मेरे देश का भविष्य ? क्या हम इन्ही के बल पर अपने भारत को विश्वगुरु और विश्व महाशक्ति बनाने का स्वप्न देख रहे हैं ? आज आवश्यकता है, चिंतन कर इस निष्कर्ष पर पहुँचने कि, की क्या हम देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं कर रहे हैं ? मेरे नजर में दोष उस बालक का नहीं दोष है माता पिता और इस व्यवस्था का जहाँ आज़ादी के इतने वर्षों बाद भी हम अंग्रेजी के गुलाम बने नजर आते हैं आखिर क्यों हम अपनी ही मातृभाषा, अपनी संस्कृति अपनी सभ्यता से भागने की कोशिश करते हैं |
मै स्वयं युवा हूँ और मुझे कहने में कोई संकोच नहीं की आज की हमारी युवा पीढ़ी भी पाश्चात्य संस्कृति के अन्धानुकरण में अपनी सभ्यता, संस्कृति और संस्कारों को भूलती जा रही है हमारे युवाओं को फ्रेंडशिप डे और वेलेंटाइन डे तो याद रहता है पर राष्ट्रीय महापुरुषों की जन्मतिथि और पुण्यतिथि नहीं | केवल भारत में रहने मात्र से हम भारतीय नहीं हो जाते हमें देश के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना होगा |
मै इस पोस्ट के माध्यम से यह अपील भी करना चाहता हूँ की हमें बचपन से बच्चों को अपनी भाषा, अपनी संस्कृति से अवगत कराना होगा देशभक्ति की भावना को उनमे समाहित करना होगा और तब यह देश अपने विश्वगुरु के पद पर पुनः प्रतिष्ठित हो सकेगा | "अभियान भारतीय" एक प्रयास है हमारे भीतर विस्मृत होती भारतीयता की भावना को पुनर्जीवित करने का, हमारा संकल्प है की हम इस अभियान के माध्यम से न केवल देशवासियों को सर्वप्रथम "भारतीय" बनने की प्रेरणा दें वरन उन्हें अपने संस्कार अपनी संस्कृति और सभ्यता से परिचित भी कराएँ |अंत में मै आपसे आव्हान करता हूँ की इस महाभियान में शामिल होकर "भारतीयता" के सन्देश को जन जन तक पहुंचावें और भारत को विश्वगुरु के रूप में प्रतिष्ठित करने के स्वप्न को साकार करें |
अभियान भारतीय को जन जन तक पहुँचाना है,
भारत को विश्वगुरु बनाना है.
"जय हिंद, जय भारत, जय अभियान भारतीय"