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{चित्र गूगल से साभार} |
मै आपका अपना गौरव शर्मा "भारतीय" आप समस्त आत्मीय जनों को ह्रदय से प्रणाम करता हूँ, एवं "अभियान भारतीय" को आप सभी से मिल रहे मार्गदर्शन एवं समर्थन के लिए सादर आभार व्यक्त करता हूँ, विदित हो की महज दो माह में ही देश के विभिन्न हिस्सों में इस अभियान को मिलने वाली लोकप्रियता ने हममे अद्भुत उत्साह का संचार किया है इस अभियान को जन जन तक पहुँचाने के लिए मै आपके सहृदय सहयोग को अनवरत बनाये रखने की कामना भी करता हूँ | संस्कार, संस्कृति एवं नैतिक मूल्यों की कमी आज के युवाओं में स्पष्ट रूप से दृष्टिगत होने लगा है, इसी विषय पर अपने विचारों के आप तक पहुँचाने तथा आपके विचारों एवं सुझावों को जानने के उद्देश्य से मै आज उपस्थित हूँ |
युवक हमारे भावी कर्णधार होते हैं, आज के युवा कल के वयस्क और मार्गदर्शक हैं अतः राष्ट्र के विकास में युवकों की भूमिका स्वतः सिद्ध है | नवयुवक सदा से अपना सर्वस्व बलिदान करके राष्ट्र को गौरवान्वित करते आये हैं, परन्तु वर्तमान में हमारे देश की युवा पीढ़ी में संस्कारों एवं नैतिक मूल्यों का विघटन स्पष्ट रूप से दृष्टिगत होने लगा है, निश्चित ही हमारा राष्ट्र प्रगति के पथ पर द्रुत गति से अग्रसर है ऐसी स्थिति में देश के युवाओं के सोच का दायरा बढ़ना उनका नवीनता और आधुनिकता की ओर आकर्षित होना स्वाभाविक है पर हम इस आधुनिकता के जाल में फंसकर अपनी महान पुरातन संस्कृति, प्राचीन परम्पराओं एवं संस्कारों को विस्मृत कर दें यह उन पूर्वजों के प्रति अन्याय होगा जिन्होंने अपने संस्कार, संस्कृति एवं परम्पराओं को संजोकर रखने हेतु अपना जीवन हंसकर कुर्बान कर दिया |
आज के युवाओं के सोंचने का नजरिया बदला है, पाश्चात्य सभ्यता के अन्धानुकरण के कारण युवा अपने नैतिक मूल्यों, परिवार, समाज एवं देश के प्रति अपने कर्तव्यों से विमुख होता जा रहा है उन्हें केवल अपने सुनहरे भविष्य के निर्माण की चिंता ही खाए जा रही है पर अपने देश के विषय पर विचार विमर्श करने के लिए समय तक नहीं है यह निश्चित ही दुखदायी है |
मेरा उद्देश्य युवाओं को कटघरे में खड़ा क रना कतई नहीं है, साथ ही यह बातें सभी युवाओं पर लागु भी नहीं होती क्योंकि आज हमारी इसी युवा पीढ़ी ने भारत को विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित भी किया है, इस पोस्ट के माध्यम से उन युवाओं से जिन्होंने इन मूल्यों को विस्मृत कर दिया है, से विनम्र अपील है की वे देश के विकास के मुख्यधारा में शामिल होकर देश को विश्वगुरु के स्थान पर प्रतिष्ठित करने में अपना अमूल्य योगदान देवें, हमारे पूर्वजों से प्राप्त संस्कारों, देश की महान संस्कृतिओ को अपने मानसपटल से विस्मृत न होने दें| साथ ही मै अपने वरिष्ठजनों एवं मार्गदर्शकों से भी सादर निवेदन करता हूँ की वे हमें अपने विचार, अपने सुझाव अवश्य प्रेषित करें जिसे हम "अभियान भारतीय" के माध्यम से युवाओं तक पहुंचाकर उन्हें अपने संस्कार अपनी संस्कृति अपने नैतिक मूल्यों से पुनः परिचित करा सकें|
वन्दे मातरम .....